vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध
»
श्लोक 22-23h
श्लोक
7.98.22-23h
उभयो: पतिते छत्रे तथैव पतितौ ध्वजौ॥ २२॥
उभौ रुधिरसिक्ताङ्गावुभौ च विजयैषिणौ।
अनुवाद
दोनों के छाते कटकर गिर पड़े, उनके झंडे टूट गये और दोनों विजय की अभिलाषा करते हुए रक्त से लथपथ हो गये।
Both their umbrellas were cut and fell down, their flags were shattered and both were soaked in blood while yearning for victory. 22 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×