Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.98.20-21h: राजन! उन दोनों के वे रथ, वे घोड़े और सारथि उस समय सुवर्णमय पंखवाले बाणों से क्षतिग्रस्त होकर विचित्र प्रकार से शोभायमान हो रहे थे॥20 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उभयोस्तौ रथौ राजंस्ते चाश्वास्तौ च सारथी॥ २०॥
रुक्मपुङ्खै: शरैश्छिन्नाश्चित्ररूपा बभुस्तदा।
अनुवाद
राजन! उन दोनों के वे रथ, वे घोड़े और सारथि उस समय सुवर्णमय पंखवाले बाणों से क्षतिग्रस्त होकर विचित्र प्रकार से शोभायमान हो रहे थे॥20 1/2॥
Rajan! Those chariots, those horses and those charioteers of both of them, after getting damaged by the arrows with golden wings, were becoming strangely beautiful at that time. 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥