श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.98.15 
इषुजालावृतं घोरमन्धकारं समन्तत:।
अनाधृष्यमिवान्येषां शूराणामभवत् तदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ चारों ओर बाणों का जाल फैलने के कारण घोर अंधकार छा गया। उस समय अन्य योद्धाओं का वहाँ पहुँचना असम्भव हो गया ॥15॥
 
There was complete darkness there because a net of arrows was spread all around. It became impossible for other warriors to reach there at that time. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)