श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.98.13 
इषुजालावृतं व्योम चक्रतु: पुरुषर्षभौ।
पूरयामासतुर्वीरावुभौ दश दिश: शरै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों वीरों ने बाणों की वर्षा से आकाश को आच्छादित कर दिया और दसों दिशाओं को बाणों से भर दिया।
 
Those two brave men covered the sky with a shower of arrows and filled all the ten directions with arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)