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mahabharat 7.97.33: हे राजन! जिस प्रकार सिंह मृग को पकड़ लेता है, उसी प्रकार नरसिंह द्रोणाचार्य ने धृष्टद्युम्न को पकड़ लिया था; किन्तु महारथी सात्यकि ने उसे बचा लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.97: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिद्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.97.33 
सिंहेनेव मृगं ग्रस्तं नरसिंहेन मारिष।
द्रोणेन मोचयामास पाञ्चाल्यं शिनिपुङ्गव:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जिस प्रकार सिंह मृग को पकड़ लेता है, उसी प्रकार नरसिंह द्रोणाचार्य ने धृष्टद्युम्न को पकड़ लिया था; किन्तु महारथी सात्यकि ने उसे बचा लिया।
 
Respected King! Just as a lion catches a deer, in the same manner Narasimha Dronacharya had caught hold of Dhrishtadyumna; but the great warrior Satyaki rescued him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)