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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 96: दोनों पक्षोंके प्रधान वीरोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.96.25 
विमुखं चैनमालोक्य माद्रीपुत्रौ महारथौ।
ववर्षतु: पुनर्बाणैर्यथा मेघौ महागिरिम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसे युद्ध से विमुख होते देख महारथी नकुल और सहदेव पुनः उस पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो दो बादल किसी विशाल पर्वत पर जल की धाराएँ बरसा रहे हों।
 
Seeing him turning away from the battle, the mighty warriors, Nakula and Sahadeva, again began showering arrows upon him, as if two clouds were pouring torrents of water on a huge mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)