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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 96: दोनों पक्षोंके प्रधान वीरोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.96.21 
शकुनिं रभसं युद्धे कृतवैरं च भारत।
माद्रीपुत्रौ च संरब्धौ शरैश्चार्दयतां भृशम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरत! माद्री के दोनों पुत्रों ने क्रोध में भरकर युद्ध में पहले से ही शत्रुवत और शीघ्रता से आगे बढ़ रहे शकुनि को अपने बाणों से बहुत कष्ट दिया।
 
Bhaarata! Both the sons of Madri, filled with anger, greatly tormented Shakuni, who was already an enemy and was rapidly advancing in the battle, with their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)