श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 96: दोनों पक्षोंके प्रधान वीरोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.96.15 
सोऽतिविद्धो बलवता महेष्वासेन धन्विना।
ईषन्मूर्च्छां जगामाशु सात्यकि: सत्यविक्रम:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
बलवान एवं महाधनुर्धर दुःशासन के बाणों से अत्यन्त घायल होकर वीर सात्यकि तुरन्त ही मूर्छित होकर गिर पड़े ॥15॥
 
Being deeply pierced by the arrows of the strong and great archer Dushasana, the valiant Satyaki immediately fell a little unconscious. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)