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श्लोक  7.95.48 
सैन्धव: पृष्ठतस्त्वासीत् सर्वसैन्यस्य भारत।
रक्षित: परमेष्वासै: कृपप्रभृतिभी रथै:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! उस समय सिंधुराज जयद्रथ पूरी सेना के पीछे था, जिसकी रक्षा महान धनुर्धर कृपाचार्य तथा अन्य रथी कर रहे थे।
 
Bharatanandan! At that time Sindhuraj Jayadratha was behind the entire army, protected by great archer Kripacharya and other charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)