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mahabharat 7.95.34: भारतभूषण! महाराज! वहाँ युद्ध करते समय आपके और शत्रुओं के योद्धाओं में से कोई भी ऐसा नहीं था जो भय के कारण युद्धभूमि छोड़कर चला गया हो॥34॥   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.95.34 
तावकानां परेषां च युध्यतां भरतर्षभ।
नासीत् कश्चिन्महाराज योऽत्याक्षीत् संयुगं भयात्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भारतभूषण! महाराज! वहाँ युद्ध करते समय आपके और शत्रुओं के योद्धाओं में से कोई भी ऐसा नहीं था जो भय के कारण युद्धभूमि छोड़कर चला गया हो॥34॥
 
Bharatbhushan! Maharaj! While fighting there, there was no one among your and the enemy's warriors who left the battlefield out of fear. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)