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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.95.32 
तथैव पार्षतेनापि काल्यमानं बलं तव।
अभवत् सर्वतो दीप्तं शुष्कं वनमिवाग्निना॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार धृष्टद्युम्न के द्वारा पीछा की जा रही आपकी सेना चारों ओर से आग उगलती हुई सूखे वन के समान जल रही थी।
 
Similarly, your army, being chased by Dhrishtadyumna, was burning like a dry forest blazing with fire breaking out from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)