Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.95.30: हे भरत! हे प्रभु! उस समय पाण्डव सेना में कोई भी ऐसा वीर नहीं था जो युद्धस्थल में द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे हुए बाणों को धैर्यपूर्वक सहन कर सके।   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.95.30 
पाण्डवानां तु सैन्येषु नास्ति कश्चित् स भारत।
दधार यो रणे बाणान् द्रोणचापच्युतान् प्रभो॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! हे प्रभु! उस समय पाण्डव सेना में कोई भी ऐसा वीर नहीं था जो युद्धस्थल में द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे हुए बाणों को धैर्यपूर्वक सहन कर सके।
 
Bhaarat! O Lord! At that time there was no brave man in the Pandava army who could have patiently endured the arrows shot from Dronacharya's bow on the battlefield. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)