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mahabharat 7.95.28: पांचाल सेनाओं को रौंदते और उन्हें अपने बाणों से मारते हुए द्रोणाचार्य का रूप प्रलयकाल की प्रज्वलित अग्नि के समान प्रचण्ड था ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.95.28 
मृद्नतस्तान्यनीकानि निघ्नतश्चापि सायकै:।
बभूव रूपं द्रोणस्य कालाग्नेरिव दीप्यत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पांचाल सेनाओं को रौंदते और उन्हें अपने बाणों से मारते हुए द्रोणाचार्य का रूप प्रलयकाल की प्रज्वलित अग्नि के समान प्रचण्ड था ॥28॥
 
Trampling the Panchala armies and killing them with his arrows, Dronacharya's appearance was like the blazing fire of the time of doomsday. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)