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mahabharat 7.95.13: जैसे सामने खड़ा हुआ पर्वत जल के प्रवाह को रोक देता है, वैसे ही युद्धस्थल में द्रोणाचार्य ने क्रुद्ध पाण्डवों, पांचालों और केकयों को रोक दिया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.95.13 
वारयामास तान् द्रोणो जलौघमचलो यथा।
पाण्डवान् समरे क्रुद्धान् पञ्चालांश्च सकेकयान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे सामने खड़ा हुआ पर्वत जल के प्रवाह को रोक देता है, वैसे ही युद्धस्थल में द्रोणाचार्य ने क्रुद्ध पाण्डवों, पांचालों और केकयों को रोक दिया॥13॥
 
Just as a mountain standing in front stops the oncoming flow of water, similarly in the battlefield Dronacharya stopped the enraged Pandavas, Panchalas and Kekayas.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)