vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
»
श्लोक 67
श्लोक
7.94.67
अङ्गिरा: प्राह पुत्रस्य मन्त्रज्ञस्य बृहस्पते:।
बृहस्पतिरथोवाच आग्निवेश्याय धीमते॥ ६७॥
अनुवाद
अंगिराणा ने इसे अपने मन्त्रज्ञ पुत्र बृहस्पति को सिखाया और बृहस्पति ने यह ज्ञान परम बुद्धिमान अग्निवेश्य को प्रदान किया ॥67॥
Angiraṇa taught it to his son Brihaspati, a mantra expert, and Brihaspati imparted this knowledge to the most intelligent Agniveshya. 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×