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mahabharat 7.94.65: उस महायुद्ध में उनके विरुद्ध नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग किया गया; किन्तु इन्द्र के कवच का बन्धन भी उनसे नहीं टूट सका।   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  7.94.65 
नानाविधैश्च शस्त्रौघै: पात्यमानैर्महारणे।
न संधि: शक्यते भेत्तुं वर्मबन्धस्य तस्य तु॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में उनके विरुद्ध नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग किया गया; किन्तु इन्द्र के कवच का बन्धन भी उनसे नहीं टूट सका।
 
In that great war, various types of weapons were used against them; But even the bond of Indra's armor could not be broken by him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)