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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 63
श्लोक
7.94.63
बधानानेन मन्त्रेण मानसेन सुरेश्वर।
वधायासुरमुख्यस्य वृत्रस्य सुरघातिन:॥ ६३॥
अनुवाद
हे देवराज! मेरे द्वारा दिए गए इस मंत्र का मानसिक जप करो और इसे अपने शरीर में बाँधकर दैत्यों के प्रधान शत्रु वृत्र का वध करो॥ 63॥
Lord of gods! Chant this mantra given by me mentally and tie it to your body to kill Vritra, the chief enemy of the demons. ॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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