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mahabharat 7.94.62: तथापि, मुझे सभी देवताओं की सहायता करनी है। अतः हे इन्द्र, मेरे शरीर से निर्मित इस तेजस्वी कवच ​​को स्वीकार करो।   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.94.62 
अवश्यं तु मया कार्यं साह्यं सर्वदिवौकसाम्।
ममेदं गात्रजं शक्र कवचं गृह्य भास्वरम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
तथापि, मुझे सभी देवताओं की सहायता करनी है। अतः हे इन्द्र, मेरे शरीर से निर्मित इस तेजस्वी कवच ​​को स्वीकार करो।
 
However, I must help all the gods. Therefore, O Indra, accept this illustrious armor that has been created from my body. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)