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mahabharat 7.94.61: भगवान शिव ने कहा- देवताओं! तुम यह जान लो कि यह प्रजापति त्वष्टा के पराक्रम से उत्पन्न हुआ अत्यन्त प्रबल एवं भयंकर कार्य है। जिन मनुष्यों ने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, उनके लिए इस कार्य को रोकना अत्यन्त कठिन है। 61॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.94.61 
शर्व उवाच
विदितं वो यथा देवा: कृत्येयं सुमहाबला।
त्वष्टुस्तेजोभवा घोरा दुर्निवार्याकृतात्मभि:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव ने कहा- देवताओं! तुम यह जान लो कि यह प्रजापति त्वष्टा के पराक्रम से उत्पन्न हुआ अत्यन्त प्रबल एवं भयंकर कार्य है। जिन मनुष्यों ने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, उनके लिए इस कार्य को रोकना अत्यन्त कठिन है। 61॥
 
Lord Shiva said- Gods! Let it be known to you that this is a very strong and terrible act arising from the might of Prajapati Tvashta. It is very difficult for people who have not controlled their mind and senses to stop this act. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)