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mahabharat 7.94.54: हे देवताओं! प्राचीन काल में त्वष्ट्र प्रजापति ने दस लाख वर्षों तक तपस्या की थी और भगवान शंकर से वरदान प्राप्त करके वृत्रासुर को उत्पन्न किया था।   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.94.54 
त्वष्ट्रा पुरा तपस्तप्त्वा वर्षायुतशतं तदा।
वृत्रो विनिर्मितो देवा: प्राप्यानुज्ञां महेश्वरात्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! प्राचीन काल में त्वष्ट्र प्रजापति ने दस लाख वर्षों तक तपस्या की थी और भगवान शंकर से वरदान प्राप्त करके वृत्रासुर को उत्पन्न किया था।
 
O Gods! In ancient times Tvashtra Prajapati had performed penance for ten lakh years and after getting a boon from Lord Shankar had created Vritraasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)