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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 44
श्लोक
7.94.44
स्वाहा स्वधा शची चैव स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा।
लक्ष्मीररुन्धती चैव कुरुतां स्वस्ति तेऽनघ॥ ४४॥
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! स्वाहा, स्वधा और शची जैसी देवियाँ आप पर सदैव कृपा करें। लक्ष्मी और अरुंधती भी आप पर कृपा करें॥ 44॥
O sinless king! May goddesses like Swaha, Swadha and Shachi always bless you. May Lakshmi and Arundhati also bless you.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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