द्रोण उवाच
करोतु स्वस्ति ते ब्रह्म ब्रह्मा चापि द्विजातय:।
सरीसृपाश्च ये श्रेष्ठास्तेभ्यस्ते स्वस्ति भारत॥ ४१॥
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - भरतनन्दन! परब्रह्म परमेश्वर तुम्हारा कल्याण करें। ब्रह्माजी और ब्राह्मण तुम्हारा कल्याण करें। श्रेष्ठ सर्प भी तुम्हारा कल्याण करें॥ 41॥
Dronacharya said - Bharatanandan! May the Supreme God bless you. May Brahmaji and Brahmins bless you. May the best snakes also bless you.॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥