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mahabharat 7.94.4-6: गुरुदेव! सिंह-पुरुष अर्जुन हमारी विशाल सेना को कुचलकर सेना में प्रवेश कर चुके हैं। अब आप अपनी बुद्धि का प्रयोग करके विचार करें कि अर्जुन का नाश कैसे किया जाए। कुछ ऐसा करें कि इस भीषण नरसंहार में सिंह-पुरुष जयद्रथ मारा न जाए। आपका कल्याण हो। आप ही हमारे सबसे बड़े आधार हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 4-6
 
 
श्लोक  7.94.4-6 
गत: स पुरुषव्याघ्र: प्रमथ्यैतां महाचमूम्॥ ४॥
अथ बुद्धॺा समीक्षस्व किन्नु कार्यमनन्तरम्।
अर्जुनस्य विघाताय दारुणेऽस्मिन् जनक्षये॥ ५॥
यथा स पुरुषव्याघ्रो न हन्येत जयद्रथ:।
तथा विधत्स्व भद्रं ते त्वं हि न: परमा गति:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
गुरुदेव! सिंह-पुरुष अर्जुन हमारी विशाल सेना को कुचलकर सेना में प्रवेश कर चुके हैं। अब आप अपनी बुद्धि का प्रयोग करके विचार करें कि अर्जुन का नाश कैसे किया जाए। कुछ ऐसा करें कि इस भीषण नरसंहार में सिंह-पुरुष जयद्रथ मारा न जाए। आपका कल्याण हो। आप ही हमारे सबसे बड़े आधार हैं।
 
Gurudev! The lion-man Arjuna has entered the formation after crushing our huge army. Now you use your intelligence to think what should be done to destroy Arjuna. Do something so that the lion-man Jayadratha is not killed in this terrible massacre. May you be blessed. You are our biggest support.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)