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mahabharat 7.94.28: युद्ध में वज्रधारी इन्द्र को भी हराया जा सकता है; परंतु रणभूमि में शत्रुओं की राजधानी को जीतने वाले अर्जुन को हराना असंभव है ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.94.28 
अपि शक्यो रणे जेतुं वज्रहस्त: पुरंदर:।
नार्जुन: समरे शक्यो जेतुं परपुरंजय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में वज्रधारी इन्द्र को भी हराया जा सकता है; परंतु रणभूमि में शत्रुओं की राजधानी को जीतने वाले अर्जुन को हराना असंभव है ॥28॥
 
Even Indra, the bearer of the thunderbolt, can be defeated in war; but it is impossible to defeat Arjuna, who conquered the capital of the enemies in the battlefield. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)