Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.94.22: मैं बूढ़ा हो गया हूँ। अतः अब मैं रथ को शीघ्रता से चलाने में असमर्थ हूँ। यहाँ, कुन्तीपुत्रों की यह विशाल सेना मेरी सेना के सामने उपस्थित है। 22.   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.94.22 
न चाहं शीघ्रयानेऽद्य समर्थो वयसान्वित:।
सेनामुखे च पार्थानामेतद् बलमुपस्थितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैं बूढ़ा हो गया हूँ। अतः अब मैं रथ को शीघ्रता से चलाने में असमर्थ हूँ। यहाँ, कुन्तीपुत्रों की यह विशाल सेना मेरी सेना के सामने उपस्थित है। 22.
 
I have become old. Hence, now I am unable to drive the chariot quickly. Here, this huge army of Kunti's sons is present in front of my army. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)