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mahabharat 7.94.14: तुम्हारी जीविका हम पर निर्भर है, फिर भी तुम हमारा अनिष्ट करने में लगे हो। मैं नहीं जानता था कि तुम मधु में डूबी हुई छुरी के समान हो।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.94.14 
अस्मानेवोपजीवंस्त्वमस्माकं विप्रिये रत:।
न ह्ययं त्वां विजानामि मधुदिग्धमिव क्षुरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी जीविका हम पर निर्भर है, फिर भी तुम हमारा अनिष्ट करने में लगे हो। मैं नहीं जानता था कि तुम मधु में डूबी हुई छुरी के समान हो।॥14॥
 
‘Your livelihood depends on us, yet you are engaged in doing harm to us. I did not know that you are like a knife dipped in honey.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)