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mahabharat 7.93.9: महाराज! वे दोनों वीर महान यश की इच्छा रखते हुए तथा आपके पुत्र के लिए अर्जुन को मारने की इच्छा रखते हुए, हाथों में धनुष लेकर बड़ी वेग से बाण चला रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.93.9 
त्वरायुक्तौ महाराज प्रार्थयानौ महद् यश:।
अर्जुनस्य वधप्रेप्सू पुत्रार्थे तव धन्विनौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे दोनों वीर महान यश की इच्छा रखते हुए तथा आपके पुत्र के लिए अर्जुन को मारने की इच्छा रखते हुए, हाथों में धनुष लेकर बड़ी वेग से बाण चला रहे थे।
 
Maharaj! Both those brave men, desirous of great fame and wishing to kill Arjuna for your son, were shooting arrows with great haste, holding bows in their hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)