Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.93.65-66h: तदनन्तर जैसे मेघ उदय होते हुए सूर्य को ढक लेता है, उसी प्रकार युद्धस्थल में अर्जुन ने रथियों में श्रेष्ठ अम्बष्ठ को गदा सहित अपने सुवर्णमय पंखयुक्त बाणों से ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  7.93.65-66h 
तत: शरैर्हेमपुङ्खै: सगदं रथिनां वरम्॥ ६५॥
छादयामास समरे मेघ: सूर्यमिवोदितम्।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जैसे मेघ उदय होते हुए सूर्य को ढक लेता है, उसी प्रकार युद्धस्थल में अर्जुन ने रथियों में श्रेष्ठ अम्बष्ठ को गदा सहित अपने सुवर्णमय पंखयुक्त बाणों से ढक दिया।
 
Then, just as a cloud covers the rising Sun, similarly, in the battlefield, Arjuna covered Ambashtha, the best among charioteers, along with his mace, with his golden-feathered arrows. 65 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)