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mahabharat 7.93.55-56h: जैसे मदमस्त हाथी अमृत पीकर सरकण्डों से भरे हुए वनों को रौंद डालता है, उसी प्रकार अर्जुन युद्धभूमि में घूमते हुए घोड़ों, रथों और हाथियों सहित अपने समस्त शत्रुओं का संहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  7.93.55-56h 
सवाजिरथमातङ्गान् निघ्नन् व्यचरदर्जुन:॥ ५५॥
प्रभिन्न इव मातङ्गो मृद्नन् नलवनं यथा।
 
 
अनुवाद
जैसे मदमस्त हाथी अमृत पीकर सरकण्डों से भरे हुए वनों को रौंद डालता है, उसी प्रकार अर्जुन युद्धभूमि में घूमते हुए घोड़ों, रथों और हाथियों सहित अपने समस्त शत्रुओं का संहार करने लगे।
 
Just as a drunken elephant, gushing with nectar, tramples the reed-covered forests, similarly Arjuna roamed the battlefield killing all his enemies including horses, chariots and elephants. 55 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)