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mahabharat 7.93.54-55h: विधिपूर्वक सजाये हुए हाथी हजारों बाणों से घायल होकर वज्र से आहत पर्वतों के समान नीचे गिर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  7.93.54-55h 
शरै: सहस्रशो विद्धा विधिवत्कल्पिता द्विपा:॥ ५४॥
शेरते भूमिमासाद्य शैला वज्रहता इव।
 
 
अनुवाद
विधिपूर्वक सजाये हुए हाथी हजारों बाणों से घायल होकर वज्र से आहत पर्वतों के समान नीचे गिर रहे थे।
 
The elephants, decorated as per rituals, pierced with thousands of arrows, were falling down like mountains struck by thunderbolts. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)