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mahabharat 7.93.52-53h: जैसे इन्द्र के वर्षा करने पर ऊँचे-नीचे स्थानों का भेद नहीं रहता, वैसे ही वहाँ रक्त के प्रवाह में डूब जाने पर सारी पृथ्वी चपटी प्रतीत हो रही थी ॥52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.93.52-53h 
यथास्थलं च निम्नं च न स्याद् वर्षति वासवे॥ ५२॥
तथासीत् पृथिवी सर्वा शोणितेन परिप्लुता।
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्र के वर्षा करने पर ऊँचे-नीचे स्थानों का भेद नहीं रहता, वैसे ही वहाँ रक्त के प्रवाह में डूब जाने पर सारी पृथ्वी चपटी प्रतीत हो रही थी ॥52 1/2॥
 
Just as one cannot distinguish between high and low places when Indra is raining, similarly the entire earth there appeared to be flat after being submerged in the flow of blood. ॥ 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)