Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.93.50-52h: उस समय अर्जुन ने वहाँ रक्त की एक भयंकर नदी प्रवाहित की, जो प्रलयकाल की नदी के समान भयावह प्रतीत हो रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पैदल, घोड़े, रथ और हाथियों को बिठाकर एक पुल तैयार किया गया हो। बाणों की वर्षा स्वयं नावों के समान प्रतीत हो रही थी। बाल घास-फूस के समान प्रतीत हो रहे थे। उस भयंकर नदी से रक्त की लहरें उठ रही थीं। कटी हुई उंगलियाँ छोटी मछलियों के समान प्रतीत हो रही थीं। अर्जुन ने स्वयं उस नदी को प्रकट किया, जो हाथियों, घोड़ों और रथों पर सवार राजकुमारों के शरीरों से बहते हुए रक्त से लबालब भरी हुई थी। हाथियों के मृत शरीर उसमें भर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 50-52h
 
 
श्लोक  7.93.50-52h 
पत्त्यश्वरथनागैश्च प्रच्छन्नकृतसंक्रमाम्।
शरवर्षप्लवां घोरां केशशैवलशाद्वलाम्।
प्रावर्तयन्नदीमुग्रां शोणितौघतरङ्गिणीम्॥ ५०॥
छिन्नाङ्गुलीक्षुद्रमत्स्यां युगान्ते कालसंनिभाम्।
प्राकरोद् गजसम्बाधां नदीमुत्तरशोणिताम्॥ ५१॥
देहेभ्यो राजपुत्राणां नागाश्वरथसादिनाम्।
 
 
अनुवाद
उस समय अर्जुन ने वहाँ रक्त की एक भयंकर नदी प्रवाहित की, जो प्रलयकाल की नदी के समान भयावह प्रतीत हो रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पैदल, घोड़े, रथ और हाथियों को बिठाकर एक पुल तैयार किया गया हो। बाणों की वर्षा स्वयं नावों के समान प्रतीत हो रही थी। बाल घास-फूस के समान प्रतीत हो रहे थे। उस भयंकर नदी से रक्त की लहरें उठ रही थीं। कटी हुई उंगलियाँ छोटी मछलियों के समान प्रतीत हो रही थीं। अर्जुन ने स्वयं उस नदी को प्रकट किया, जो हाथियों, घोड़ों और रथों पर सवार राजकुमारों के शरीरों से बहते हुए रक्त से लबालब भरी हुई थी। हाथियों के मृत शरीर उसमें भर रहे थे।
 
At that time Arjuna unleashed a dreadful river of blood there, which appeared as frightening as a river during the time of deluge. It was as if a bridge had been prepared by laying men on foot, horses, chariots and elephants in it, the shower of arrows itself appeared like boats. Hair appeared like weeds and grass. Waves of blood were rising from that dreadful river. Severed fingers appeared like small fishes. Arjuna himself revealed that river, which was brimming with blood flowing from the bodies of princes riding elephants, horses and chariots. Dead bodies of elephants were filling it. 50-51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)