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mahabharat 7.93.44: वहाँ हजारों-लाखों की संख्या में दार्वातिसार, दारद और पुण्ड्र आदि संस्कारहीन म्लेच्छ उपस्थित थे, जिनकी गिनती नहीं की जा सकती थी ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.93.44 
दार्वातिसारा दरदा: पुण्ड्राश्चैव सहस्रश:।
ते न शक्या: स्म संख्यातुं व्रात्या: शतसहस्रश:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ हजारों-लाखों की संख्या में दार्वातिसार, दारद और पुण्ड्र आदि संस्कारहीन म्लेच्छ उपस्थित थे, जिनकी गिनती नहीं की जा सकती थी ॥ 44॥
 
Thousands and millions of mlecchas like Darvatisaar, Darada and Pundra, who were devoid of any sanskars, were present there, and they could not be counted. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)