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mahabharat 7.93.43: उन्मत्त हाथियों के समान पराक्रमी द्रविड़ और नन्दिनी गाय से उत्पन्न मृत्यु के समान निपुण म्लेच्छ भी वहाँ युद्ध कर रहे थे ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.93.43 
द्राविडास्तत्र युध्यन्ते मत्तमातङ्गविक्रमा:।
गोयोनिप्रभवा म्लेच्छा: कालकल्पा: प्रहारिण:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उन्मत्त हाथियों के समान पराक्रमी द्रविड़ और नन्दिनी गाय से उत्पन्न मृत्यु के समान निपुण म्लेच्छ भी वहाँ युद्ध कर रहे थे ॥ 43॥
 
The Dravidians, as valiant as mad elephants, and the Mlecchas, as adept as Death, born of the Nandini cow, were also fighting there. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)