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mahabharat 7.93.41-42: राक्षसी माया को जानने वाले, अत्यन्त भयानक रूप वाले, भयंकर नेत्रों वाले, कौओं के समान काले, दुष्ट, स्त्रैण और झगड़ालू यवन, पारद, शक और बाह्लीक भी युद्ध के लिए वहाँ उपस्थित हुए ॥41-42॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  7.93.41-42 
विदन्त्यसुरमायां ये सुघोरा घोरचक्षुष:॥ ४१॥
यवना: पारदाश्चैव शकाश्च सह बाह्लिकै:।
काकवर्णा दुराचारा: स्त्रीलोला: कलहप्रिया:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राक्षसी माया को जानने वाले, अत्यन्त भयानक रूप वाले, भयंकर नेत्रों वाले, कौओं के समान काले, दुष्ट, स्त्रैण और झगड़ालू यवन, पारद, शक और बाह्लीक भी युद्ध के लिए वहाँ उपस्थित हुए ॥41-42॥
 
The Yavanas, Paradas, Shakas and Bahlikas, who know the demonic illusion, whose appearance is very fearful, who have dreadful eyes, who are black like crows, wicked, womanisers and quarrelsome, also appeared there for the war. ॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)