Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.93.36: हजारों बाणों से बिंधे हुए, रक्त बहाते हुए हाथी ऐसे प्रतीत हो रहे थे, जैसे वर्षा ऋतु में गेरू मिश्रित जल के झरने बहते हुए पर्वत हों।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.93.36 
शरै: सहस्रशो विद्धा द्विपा: प्रसृतशोणिता:।
अदृश्यन्ताद्रय: काले गैरिकाम्बुस्रवा इव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हजारों बाणों से बिंधे हुए, रक्त बहाते हुए हाथी ऐसे प्रतीत हो रहे थे, जैसे वर्षा ऋतु में गेरू मिश्रित जल के झरने बहते हुए पर्वत हों।
 
Pierced by thousands of arrows, the elephants gushing out blood looked like mountains flowing with waterfalls of ochre mixed water during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)