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mahabharat 7.93.35: बाणों से छिन्न-भिन्न भुजाएँ और कटे हुए सिर ऐसे गिरते हुए दिखाई दे रहे थे, मानो पक्षी वृक्षों से गिर रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.93.35 
बाहवो विशिखैश्छिन्ना: शिरांस्युन्मथितानि च।
पतमानान्यदृश्यन्त द्रुमेभ्य इव पक्षिण:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
बाणों से छिन्न-भिन्न भुजाएँ और कटे हुए सिर ऐसे गिरते हुए दिखाई दे रहे थे, मानो पक्षी वृक्षों से गिर रहे हों।
 
The arms torn off by the arrows and the heads cut off were seen falling as if birds were falling from the trees. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)