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mahabharat 7.93.34: उस समय उन मस्तकों और बाजूबंदों से आवृत भूमि, सर्पों से घिरी हुई स्वर्णमयी चट्टानों से आवृत भूमि के समान प्रतीत हो रही थी। 34।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.93.34 
तै: शिरोभिर्मही कीर्णा बाहुभिश्च सहाङ्गदै:।
बभौ कनकपाषाणा भुजगैरिव संवृता॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन मस्तकों और बाजूबंदों से आवृत भूमि, सर्पों से घिरी हुई स्वर्णमयी चट्टानों से आवृत भूमि के समान प्रतीत हो रही थी। 34।
 
At that time the land covered by those heads and the arms with armlets looked like a land covered with golden rocks surrounded by serpents. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)