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mahabharat 7.93.30: जिस प्रकार हाथी कमलों से भरे सरोवर को मथता है, उसी प्रकार जब पार्थ आपकी सेनाओं का मंथन कर रहे थे, तब आपके क्षत्रिय योद्धा उन्हें रोक नहीं सके।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.93.30 
लोडयन्तमनीकानि द्विपं पद्मसरो यथा।
नाशक्नुवन् वारयितुं पार्थं क्षत्रियपुङ्गवा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार हाथी कमलों से भरे सरोवर को मथता है, उसी प्रकार जब पार्थ आपकी सेनाओं का मंथन कर रहे थे, तब आपके क्षत्रिय योद्धा उन्हें रोक नहीं सके।
 
Just as an elephant churns a lake full of lotuses, similarly, your Kshatriya warriors could not stop Partha while he was churning your armies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)