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mahabharat 7.93.3: उस समय पाण्डुपुत्र अर्जुन ने अपने बाणों से उपर्युक्त सेनाओं के छः हजार सैनिकों तथा अन्य योद्धाओं को मार गिराया। जिस प्रकार छोटे-छोटे मृग बाघ से डरकर भाग जाते हैं, उसी प्रकार वे अर्जुन से भयभीत होकर वहाँ से भागने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.93.3 
तेषां षष्टिशतानन्यान् प्रामथ्नात् पाण्डव: शरै:।
ते स्म भीता: पलायन्ते व्याघ्रात् क्षुद्रमृगा इव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस समय पाण्डुपुत्र अर्जुन ने अपने बाणों से उपर्युक्त सेनाओं के छः हजार सैनिकों तथा अन्य योद्धाओं को मार गिराया। जिस प्रकार छोटे-छोटे मृग बाघ से डरकर भाग जाते हैं, उसी प्रकार वे अर्जुन से भयभीत होकर वहाँ से भागने लगे।
 
At that time, Arjuna, the son of Pandu, struck down six thousand soldiers of the above-mentioned armies and other warriors with his arrows. Just as small deer run away in fear from a tiger, in the same way, they got frightened of Arjuna and started fleeing from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)