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mahabharat 7.93.27-28: श्रुतायु और अच्युतायु को मारा गया देखकर उनके पुत्र, पुरुषोत्तम नियतायु और दुर्गुतायु, पिता के वध से दुःखी होकर क्रोध में भरकर नाना प्रकार के बाणों की वर्षा करते हुए अर्जुन के सामने आये ॥27-28॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  7.93.27-28 
श्रुतायुषं च निहतं प्रेक्ष्य चैवाच्युतायुषम्।
नियतायुश्च संक्रुद्धो दीर्घायुश्चैव भारत॥ २७॥
पुत्रौ तयोर्नरश्रेष्ठौ कौन्तेयं प्रतिजग्मतु:।
किरन्तौ विविधान् बाणान् पितृव्यसनकर्शितौ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
श्रुतायु और अच्युतायु को मारा गया देखकर उनके पुत्र, पुरुषोत्तम नियतायु और दुर्गुतायु, पिता के वध से दुःखी होकर क्रोध में भरकर नाना प्रकार के बाणों की वर्षा करते हुए अर्जुन के सामने आये ॥27-28॥
 
India Seeing Shrutayu and Achyutayu killed, their sons, the best of men, Niyatayu and Durgayu, being saddened by the killing of their father, filled with anger, came to face Arjuna, showering various types of arrows. 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)