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mahabharat 7.93.17-18: तत्पश्चात् रथियों में श्रेष्ठ श्रुतायु और अच्युतायु ने अपना लक्ष्य सामने पाकर अर्जुन और वृष्णिवंशी श्रीकृष्ण पर सब ओर से बाणों की वर्षा करके चक्र, कुबेर, रथ, अश्व, ध्वजा और पताका सहित उन्हें रणभूमि से लुप्त कर दिया। वह अद्भुत घटना घटी। 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  7.93.17-18 
ततस्तौ रथिनां श्रेष्ठौ लब्धलक्ष्यौ धनंजयम्।
वासुदेवं च वार्ष्णेयं शरवर्षै: समन्तत:॥ १७॥
सचक्रकूबररथं साश्वध्वजपताकिनम्।
अदृश्यं चक्रतुर्युद्धे तदद्भुतमिवाभवत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रथियों में श्रेष्ठ श्रुतायु और अच्युतायु ने अपना लक्ष्य सामने पाकर अर्जुन और वृष्णिवंशी श्रीकृष्ण पर सब ओर से बाणों की वर्षा करके चक्र, कुबेर, रथ, अश्व, ध्वजा और पताका सहित उन्हें रणभूमि से लुप्त कर दिया। वह अद्भुत घटना घटी। 17-18॥
 
Thereafter, Shrutayu and Achyutayu, the best among the charioteers, finding their target in front, showered arrows on Arjuna and the Vrishni dynasty Shri Krishna from all sides and made them disappear from the battlefield along with the chakra, kubar, chariot, horse, flag and ensign. That wonderful thing happened. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)