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mahabharat 7.93.16: अर्जुन को मूर्छित देखकर भगवान श्रीकृष्ण अत्यन्त व्याकुल हो गए और उनके हृदय को प्रसन्न करने वाले वचनों द्वारा उन्हें सान्त्वना देने लगे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 93: अर्जुनद्वारा श्रुतायु, अच्युतायु, नियतायु, दीर्घायु, म्लेच्छ-सैनिक और अम्बष्ठ आदिका वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.93.16 
कृष्णश्च भृशसंतप्तो दृष्ट्वा पार्थं विचेतनम्।
आश्वासयत् सुहृद्याभिर्वाग्भिस्तत्र धनंजयम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन को मूर्छित देखकर भगवान श्रीकृष्ण अत्यन्त व्याकुल हो गए और उनके हृदय को प्रसन्न करने वाले वचनों द्वारा उन्हें सान्त्वना देने लगे॥16॥
 
Seeing Arjun unconscious, Lord Krishna became very upset and began to reassure him with words that were pleasing to his heart. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)