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mahabharat 7.92.59: गिरते समय पर्नाशा का प्रिय पुत्र श्रुतयुध आँधी से उखड़ी हुई अनेक शाखाओं वाले वृक्ष के समान प्रतीत हुआ।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  7.92.59 
पतमानस्तु स बभौ पर्णाशाया: प्रिय: सुत:।
स भग्न इव वातेन बहुशाखो वनस्पति:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
गिरते समय पर्नाशा का प्रिय पुत्र श्रुतयुध आँधी से उखड़ी हुई अनेक शाखाओं वाले वृक्ष के समान प्रतीत हुआ।
 
While falling, Parnasha's beloved son Srutaayudh appeared like a tree with many branches uprooted by a storm. 59
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)