श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.92.53 
प्रतिजग्राह तां कृष्ण: पीनेनांसेन वीर्यवान्।
नाकम्पयत शौरिं सा विन्ध्यं गिरिमिवानिल:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वीर श्रीकृष्ण ने उस गदा का प्रहार अपने बलवान कंधे पर सहन किया। किन्तु जिस प्रकार वायु विन्ध्य पर्वत को हिला नहीं सकती, उसी प्रकार वह गदा श्रीकृष्ण को भी नहीं हिला सकी।
 
The valiant Sri Krishna bore the blow of that mace on his strong shoulder. But just as the wind cannot shake the Vindhya mountain, in the same way that mace could not make Sri Krishna tremble. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)