श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  7.92.50-51 
उवाच चैनं भगवान् पुनरेव जलेश्वर:॥ ५०॥
अयुध्यति न मोक्तव्या सा त्वय्येव पतेदिति।
हन्यादेषा प्रतीपं हि प्रयोक्तारमपि प्रभो॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
गदा देकर वरुणदेव ने उससे पुनः कहा - 'पुत्र! इस गदा से युद्ध न करने वाले पर प्रहार मत करना; अन्यथा यह तुम्हारे ऊपर गिरेगी। हे बलवान पुत्र! यह गदा प्रतिकूल रीति से प्रयोग करने वाले को भी मार सकती है।'॥50-51॥
 
After giving him the mace, Lord Varuna again said to him, 'Son! Do not attack anyone who is not fighting with this mace; otherwise it will fall on you. Powerful son! This mace can kill even a person who is using it in an unfavorable manner.'॥ 50-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)