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mahabharat 7.92.48-49h: इस अस्त्र के प्रभाव से आपका पुत्र युद्धभूमि में शत्रुओं के लिए सदैव संकट बना रहेगा। अतः आपकी मानसिक चिंताएँ दूर हो जाएँ। 48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.92.48-49h 
दुर्धर्षस्त्वेष शत्रूणां रणेषु भविता सदा॥ ४८॥
अस्त्रस्यास्य प्रभावाद् वै व्येतु ते मानसो ज्वर:।
 
 
अनुवाद
इस अस्त्र के प्रभाव से आपका पुत्र युद्धभूमि में शत्रुओं के लिए सदैव संकट बना रहेगा। अतः आपकी मानसिक चिंताएँ दूर हो जाएँ। 48 1/2॥
 
With the effect of this weapon, your son will always be a threat to the enemies in the battlefield. Therefore, your mental worries should go away. 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)