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mahabharat 7.92.47-48h: हे पर्नाशे, नदियों में श्रेष्ठ! मनुष्य किसी भी प्रकार से अमर नहीं हो सकता। यहाँ जन्म लेने वालों की मृत्यु अवश्यम्भावी है।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.92.47-48h 
नास्ति चाप्यमरत्वं वै मनुष्यस्य कथंचन॥ ४७॥
सर्वेणावश्यमर्तव्यं जातेन सरितां वरे।
 
 
अनुवाद
हे पर्नाशे, नदियों में श्रेष्ठ! मनुष्य किसी भी प्रकार से अमर नहीं हो सकता। यहाँ जन्म लेने वालों की मृत्यु अवश्यम्भावी है।
 
O Parnaashe, the best among the rivers! Man cannot become immortal by any means. Death is inevitable for those who are born here. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)