Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.92.46-47h: तब वरुण प्रसन्न हुए और बोले, 'मैं इसे यह दिव्य अस्त्र एक लाभकारी वरदान के रूप में दे रहा हूँ, जिससे तुम्हारा यह पुत्र अविनाशी होगा।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.92.46-47h 
वरुणस्त्वब्र्रवीत् प्रीतो ददाम्यस्मै वरं हितम्॥ ४६॥
दिव्यमस्त्रं सुतस्तेऽयं येनावध्यो भविष्यति।
 
 
अनुवाद
तब वरुण प्रसन्न हुए और बोले, 'मैं इसे यह दिव्य अस्त्र एक लाभकारी वरदान के रूप में दे रहा हूँ, जिससे तुम्हारा यह पुत्र अविनाशी होगा।
 
Then Varuna became pleased and said, 'I am giving him this divine weapon as a beneficial boon, by which this son of yours will be indestructible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)