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mahabharat 7.92.24: कृतवर्मा के रथ में कुन्तीपुत्र अर्जुन को उलझा हुआ देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने मन ही मन सोचा कि हमें यहाँ अधिक समय नहीं लगाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.92.24 
दृष्ट्वा विषक्तं कौन्तेयं कृतवर्मरथं प्रति।
चिन्तयामास वार्ष्णेयो न न: कालात्ययो भवेत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कृतवर्मा के रथ में कुन्तीपुत्र अर्जुन को उलझा हुआ देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने मन ही मन सोचा कि हमें यहाँ अधिक समय नहीं लगाना चाहिए।
 
Seeing Kunti's son Arjun entangled in Kritavarma's chariot, Lord Krishna thought to himself that we should not spend much time here. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)